आत्मा की अमरता और अखंडता~ The Immortality and Eternity of the Soul

 "Our Question, Your Answer"/ हमारा प्रश्न, आपका उत्तर"

Question 3:

A) Explain the immortality and eternity of the soul.

B) Why is Arjuna’s decision not to fight against his duty? What did the Lord say about it? What does Yogaḥ Karmasu Kauśalam mean?

C) Explain the steps of mental downfall and their consequences. 

प्रश्न 3:

A) आत्मा की अमरता और अखंडता स्पष्ट करें।

B) अर्जुन का युद्ध न करने का निर्णय उसके कर्तव्य के विपरीत क्यों है? इस बारे में भगवान ने क्या कहा है? योगः कर्मसु कौशलम् का क्या अर्थ है?

C) मन के अध: पतन की सीढ़ियाँ स्पष्ट करें और उनके परिणाम लिखें।

Ans. 1. Manju Garg didi  ka answer ....

 A) प्रथम उत्तरआत्मा अमर है अखंड है क्योंकि आत्मा आजन्मा नित्य सनातन पुरातन है/ शरीर के मारे जाने पर यह नहीं मरती आत्मा पुराने शरीर को त्याग कर नरेश शरीर को प्राप्त होता है इसी को शास्त्र नहीं कटट सकते आज नहीं जला सकती जल जिला नहीं कर सकता और वायु छुपा नहीं सकती आत्मा सबके शरीर में श्रद्धा ही अवध है 

B) द्वितीय है अर्जुन या तो तू युद्ध में मारााएगा यह स्वर्ग को प्राप्त होगा यह युद्ध में जीतकर पृथ्वी का राज्य भोगेगा इसलिए युद्ध करने के लिए तैयार हो जाए जिससे तू पाप को नहीं प्राप्त होगा इस कर्म योग रूप धर्म का थोड़ा सा भी साधन जन्म मृत्यु रूप महान भाई से रक्षा कर लेता है तेरा कर्म करने में भी अधिकार है उसके फलों में कभी नहीं इसलिए आसक्ति को त्याग कर सिद्धि सिद्धि में समान बुद्धि वाला होकर योग में स्थित हुआ कर्तव्य कर्मों को कर तू योग को प्राप्त होगा जाएगा तेरा परमात्मा मिनट सहयोग हो जाएगा

C) तृतीयियों के द्वारा विषयों को ग्रहण करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्तिइंद्रियों के द्वारा विषयों को ग्रहण करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत हो जाते हैं परंतु उन में रहने वाली आसक्ति निवृत्ति नहीं होती इस स्थितिप्रज्ञा पुरुष भी आ सकती भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्तिइंद्रियों के द्वारा विषयों को ग्रहण करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत हो जाते हैं परंतु उन में रहने वाली आसक्ति निवृत्ति नहीं होती इस स्थित प्रज्ञा पुरुष भी आ सकती भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत हो जाती है इसलिए इंद्रियों को वश में करके ध्यान में बैठो विषयों का चिंतन ना करें क्योंकि उसे कामना उत्पन्न होती है कामना मेंकामना में विभिन्न पढ़ने से क्रोध का उत्पन्न होता है क्रोध से मुंह स्मृति एवं स्मृति की बम के हो जाने से बुद्धि का नाश होता है बुद्धि का नाश होने से पुरुष अपनी स्थिति में गिर जाता है

Ans. 2.  Hemangi didi ....

A) आत्मा की अमरता और अखंडता स्पष्ट करें।

आत्मा अविनाशी, अजर और अमर है, आत्मा का न कोई जन्म है न कोई अंत है,आत्मा को ना तो कोई जला सकता है, पानी  भीगा,सकता है, आत्मा को न हवा सुख शक्ति है, ना तो तलवार काट सकती, भौतिक शरीर नाशवान है, वाह केवल एक जन्म तक साथ है,आपका पास दूसरा भौतिक,शरीर आएगा लेकिन आत्मा वहीं रहेगी , उसका अस्तित्व अनेक जन्मों तक चलता रहेगा जबतक कि वह मोक्ष प्राप्त नहीं कर लेटी

B) अर्जुन का युद्ध न करने का निर्णय उसके कर्तव्य के विपरीत क्यों है? इस बारे में भगवान ने क्या कहा है? योगः कर्मसु कौशलम् का क्या अर्थ 

अर्जुन युद्ध के लिए तैयार नहीं है ,और वह मित्र और परिवार को मार्कर दुखी नहीं होना चाहते लेकिन कृष्णा समजते हैं की, धर्म नमक एक अवधारण के कारण युद्ध करना उसका एक कर्तव्य है 

योग से कर्मों में कुशलता आती है,व्यावहारिक दृष्टि से 

योग शरीर मन और  भावना ओ को सन्तुलित करने का साधन है 

C) मन के अध: पतन की सीढ़ियाँ स्पष्ट करें और उनके परिणाम लिखें।

मनुष्य की बढ़ती व्यस्तता ,और मन की व्याकुलता के कारण आधुनिक युग में योग की अति आवश्यकता हो गई है 

और शरीर अति तनवग्रस्ता हो गए हैं,भागदौड़ की जिंदगी के कारण सब लोग रोगी होते जा रहे है व्यक्ति के अन्तर्मुखी और बाह्यमुखी स्थिति में अंतर आ गया है

जय श्री कृष्णा

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